यही रहे बस अब तुम्हारे जीवन का आधार स्वच्छ रहे प्रकृति.. निर्मल रहें संस्कार

 

 

 

 

*कोरोना देवदूत या महामारी*

स्वप्न में कोरोना से मुलाक़ात हुई.. मैंने पूछा..
कोरोना..कोरोना ओ कोरोना !!
क्या सचमुच तुम एक विनाश हो, महामारी हो?
एक दानव हो या अभिशाप हो?
या हो कोई देवदूत या हो कोई चेतावनी
बताओ तो कौन हो तुम?

कोरोना ने उत्तर दिया..
हे मानव..महामारी तो तुमने समझा
मैं तो एक देवदूत हूँ
लेकर आया हूँ देव-सन्देश
आना पड़ा मुझे याद दिलाने
कि तुम नहीं हो इस पृथ्वी के मालिक
भूल बैठे हो प्रेम त्याग समर्पण के संस्कार
हावी हुआ इस दुनियाँ पर अब तुम्हारा अहंकार
दया भाव तुमने खत्म किया ना फिर पश्चाताप किया
दीन दुखियों..पशु पक्षियों पर तुमने अत्याचार किया
पेड़ काटकर वन जलाकर प्रकृति पर खूब अन्याय किया
कर्तव्य भूले मर्यादा भूले..तुमने व्याभिचार किया
आया हूँ मैं एहसास दिलाने हे मानव !
तुम ईश्वर की संतान हो..इस दुनियां की शान हो
क्यों भूले हो कर्तव्य पथ को..अपने अंदर के इंसान को
बैठकर अब लॉकडाउन में घर पर
खुद की ज़रा पहचान करो
चला जाऊंगा खुद ही इस धरा से
बस पहले एक वचन भरो
सादा भोजन..सादा जीवन और होंगे उच्च विचार

यही रहे बस अब तुम्हारे जीवन का आधार
स्वच्छ रहे प्रकृति.. निर्मल रहें संस्कार
हे मानव! मैं महामारी नहीं देवदूत हूँ
देने आया हूँ देव-सन्देश
डरो ना मुझसे !!
करो साधना घर पर रहकर
अपनी भूलों का पश्चाताप करो
प्रेम, क्षमा और दया भाव को भीतर आत्मसात करो

✍️ अनुजा कौशिक

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