Supreme Court का 50 फीसदी स्टाफ कोरोना संक्रमित, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होगी बातचित

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दिल्ली: देशभर में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के साथ-साथ अब एक और बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी मिली है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का 50 फीसदी स्टाफ कोरोना से संक्रमित हो गया है। ऐसे में अब सभी न्यायाधीश अपने घर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करेंगे। वहीं पीठ भी निर्धारित समय से एक घंटा देरी से बैठेंगी। कोरोना के मामलों को देखते हुए कोर्ट रूम सहित पूरे कोर्ट परिसर को सैनेटाइज किया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने कोरोना पॉजिटिव कर्मचरियों का कोई आंकड़ा नहीं जारी किया है।

जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट Supreme Court जजों को सीधे सेवाएं देने वाले करीब 50 प्रतिशत कर्मचारी अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं। ऐसे में जज आज अपने-अपने घर से मामलों की सुनवाई करेंगे। इसी के साथ बताया गया है कि जिन मामलों की सुनवाई 10.30 बजे शुरू होनी थी वो अब 11.30 बजे होगी वहीं जिन मामलों की सुनवाई 11 बजे होनी थी वो 12 बजे होगी।

वहीं दूसरी ओर देश में कोरोना के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। रविवार को एक दिन में 1,52,879 नए मामले दर्ज किए गए थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, महाराष्‍ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, दिल्‍ली, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान में कोविड-19 के सबसे ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं। नए मामलों के 80.92 फीसदी केस इन्‍हीं 10 राज्‍यों से दर्ज किए गए हैं। उत्तर प्रदेश और गुजरात सरकार ने भी अब बढ़ते केस को देखते हुए 30 अप्रैल तक स्कूल और कॉलेज को बंद रखने का आदेश दिया है।

देश में एक्टिव केस 11 लाख के पार चला गया, जो देश के कुल पॉजिटिव मामलों का 8.29 फीसदी है. मंत्रालय के अनुसार, 5 राज्‍यों- महाराष्‍ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और केरल की भारत के कुल एक्टिव केस में 70.82 फीसदी भागीदारी है। वहीं एक्टिव केस में सिर्फ महाराष्ट्र का हिस्सा 48.57 फीसदी है।

रेमेडिसविर पर बैन

वहीं दूसरी ओर केंद्र ने हालात में सुधार होने तक रेमेडिसविर (Remdesivir) इंजेक्शन और रेमेडिसविर एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (API) के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। वहीं रेमेडिसविर के सभी घरेलू निर्माताओं को कहा गया है कि वे अपनी वेबसाइट पर दवा से जुड़ी सभी जानकारी साझा करें।

दरअसल कोरोना के इलाज में रेमेडिसविर एक प्रमुख एंटी-वायरल दवा माना जाती है। इसलिए लगातार बढ़ रहे मामलों के मद्देनजर सरकार ने रेमेडिसविर तक अस्पतालों और मरीजों की आसान पहुँच सुनिश्चित करने के लिए ये कदम उठाए हैं।

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