RBI ने घटाईं ये ब्याज दर: जाने आम आदमी और अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ेगा असर

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikant Das) ने आज प्रेसवार्ता करते हुए बड़ा ऐलान किया है। रिवर्स रेपो रेट में 0.25 फीसदी कटौती का ऐलान किया है उन्होंने रिवर्स रेपो रेट 0.25 फीसदी घटकर 3.75 फीसदी पर आ गई है इस फैसले से बैंकों को RBI के पास जमा पैसे पर कम ब्याज मिलेगा इससे बैंकों के पास ज्यादा लिक्विडिटी रहेगी यानी उनके पास पैसा ज्यादा होगा जिससे आम लोगों लोन मिलने भी आसानी होगी।

RBI प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस्तेमाल किए गए टर्म के बारे में जाने:

जब हमें पैसे की जरूरत हो और अपना बैंक अकाउंट खाली हो तो हम बैंक से कर्ज लेते हैं इसके बदले हम बैंक को ब्याज चुकाते हैं। इसी तरह बैंक को भी अपनी जरूरत या रोजमर्रा के कामकाज के लिए काफी रकम की जरूरत पड़ती है। इसके लिए बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं. बैंक इस लोन पर रिजर्व बैंक को जिस दर ब्याज चुकाते हैं, उसे रेपो रेट कहते हैं।

रेपो रेट- जब बैंक को रिजर्व बैंक से कम ब्याज दर पर लोन मिलेगा तो उनके फंड जुटाने की लागत कम होगी। इस वजह से वे अपने ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं। इसका मतलब यह है कि रेपो रेट कम होने पर आपके लिए होम, कार या पर्सनल लोन पर ब्याज की दरें कम हो सकती हैं।

रिवर्स रेपो रेट- देश में कामकाज कर रहे बैंकों के पास जब दिन-भर के कामकाज के बाद रकम बची रह जाती है, तो उस रकम को भारतीय रिजर्व बैंक में रख देते हैं। इस रकम पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता है। भारतीय रिजर्व बैंक इस रकम पर जिस दर से बैंकों को ब्याज देता है, उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं।

इससे क्या होता है आम आदमी पर असर- जब भी बाज़ार में नकदी की उपलब्धता बढ़ जाती है तो महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। आरबीआई इस स्थिति में रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें. इस तरह बैंकों के कब्जे में बाजार में बांटने के लिए कम रकम रह जाती है।

CRR के घटने और बढ़ने से क्या होता है- अगर सीआरआर बढ़ता है तो बैंकों को अपनी पूंजी का बड़ा हिस्सा भारतीय रिजर्व बैंक के पास रखना होगा अगर रिजर्व बैंक सीआरआर को घटाता है तो बाजार में नकदी का प्रवाह बढ़ जाता है।आरबीआई सीआरआर में बदलाव तभी करता है, जब बाज़ार में नकदी की तरलता पर तुरंत असर नहीं डालना हो। वास्तव में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बदलाव की तुलना में सीआरआर में किए गए बदलाव से बाज़ार में नकदी की उपलब्धता पर ज्यादा वक्त में असर पड़ता है।

 

 

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