उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों की हक़ीक़त दिखने को आम आदमी पार्टी ने चलाया #selfiewithschool अभियान

देहरादून:  मनीष सिसोदिया ने दिल्ली स्कूल मॉडल पर यूपी के बाद उत्तराखंड के प्रमुख मंत्री मैदान कौशिक को खुली बहस के लिए आमंत्रित किया  लेकिन वो नही आये यही नही उन्हें दिल्ली आ कर वहां के सरकारी स्कूल को देखने तक कि बाद कह दी गयी उसके बावजूद सरकार के।किसी मंत्री ने जवाब देना ज़रूरी नही समझा ।

आम आदमी पार्टी यही ही नही रुकी अब उसने उत्तराखंड में एक अभियान छेड़ महकमें को चुनौती दे डाली ।

उत्तराखंड में आम आदमी पार्टी ने #selfiwithschool  अभियान  चला डाला यहां अभियान 8 जनवरी से 10 जनवरी तक चलाया जा रहा है । इस अभियान के ज़रिए अभिभावकों से अपील की गई है की वो उत्तराखंड सरकार के बदहाल स्कूल की

तस्वीर ले कर उस जगह के नाम के साथ व्हाट्सएप करे ।हालांकि इन दो दिनों में इस अभियान को  जनता का भारी समर्थन देखने को मिला है ।

तीन दिनों तक चलने वाले इस अभियान के पहले ही दिन  कई संख्या में लोगों ने पूरे उत्तराखंड से अपने आस पास के बदहाल स्कूलों के वीडियो और फोटो आम  आदमी पर्टी को व्हाट्सएप के ज़रिए भेजा जा रहा है।

वही जनता के इस भारी समर्थन को देखते हुए ,आप  प्रवक्ता उमा सिसोदिया ने  उत्तराखंड की जनता का आभार जताते हुए इस #selfiewithschool अभियान में बढ़ चढ़ कर भाग लेने की अपील की ताकि प्रदेश के स्कूलों के हालत से सभी रूबरू हो सके ।

जनता से विडियो और फोटो के जरिए सोशल प्लेटफॉर्म पर डालने की अपील की थी । अभियान के पहले दिन उत्तराखंड के कई जिलों से लोगों ने आप के व्हाट्सएप नंबर पर ऐसी कई स्कूलों की फोटो और वीडियो भेजी जो सालों से बद हाली के दौर से गुजर रहे हैं । अभी ये अभियान दो दिन और चलना है जिसमें आप को पूरी उम्मीद है प्रदेश की जनता आने वाले दो दिनों में ऐसी कई विडियोज़ के जरिए उत्तराखंड की शिक्षा और स्कूलों के हालात को दिखाएगी। आप की प्रवक्ता उमा सिसोदिया ने बताया कि प्रदेश की जनता भी चाहती है कि उनके प्रदेश के अधिकतर सरकारी स्कूलों की दयनीय हालत पिछले कई सालों से है जिस पर बीजेपी कांग्रेस दोनों सरकारों ने काम करना बेहतर नहीं समझा इसलिए आज भी उत्तराखंड में स्कूलों की बदहाली और बंद होते स्कूलों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है ।

इनके लिए  बजट तो जारी किया जाता है लेकिन वो बजट या तो अधिकारी खा जाते हैं ,या नेता उस पैसे की बंदरबांट कर जाते हैं। आज प्रदेश में सरकारी स्कूलों में जो बच्चे पढ रहे हैं ,उनके लिए सुविधाएं,इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर मात्र ये जर्जर बिल्डिंग है जो कभी भी किसी हादसे को न्योता दे सकती है । प्रदेश में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए जो पहल सरकार द्वारा की जानी चाहिए थी ,वो पहल सरकार आज तक करने में नाकाम रही है।

उत्तराखंड में भी हजारों स्कूल हैं ,यहां के बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए ,लेकिन सिर्फ सरकार की नाकामियों की वजह से आज सरकारी स्कूलों का स्तर गिर चुका है। आज लोगों का प्रदेश में प्राईवेट स्कूलों की तरफ रुझान बढने लगा है। अगर शिक्षा के क्षेत्र में अभी से काम नहीं किया गया तो, वो दिन दूर नहीं जब प्रदेश में एक भी सरकारी स्कूल नहीं बचेगा।