जानिए CM धामी ने क्यों कहा- मुझे सीएम बने 12-13 दिन हो गए, अब कोई गुलदस्ता लेकर ना आए

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देहरादून : मुख्यमंत्री (CM) पुष्कर सिंह धामी ने सहस्त्रधारा हेलीपैड के निकट एम.डी.डी.ए सिटी पार्क में वृक्षारोपण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला सम्पन्नता, हरियाली एवं पर्यावरण संरक्षण का पर्व है। यह पर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर एवं परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। वृक्षारोपण का कार्यक्रम केवल सरकारी कार्यक्रम तक ही सीमित न रहे। इसे जन -जन  का कार्यक्रम बनाने के लिए लोगों को जागरूक किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वृक्षारोपण के साथ ही उनका संरक्षण हो इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

वहीं कार्यक्रम से पहले उनके स्वागत पर उन्हें गुलदस्ते दिए गए जिस पर सीएम ने मंच से कहा कि उन्हें सीएम बने अब 12 13 दिन हो गए हैं इसलिए अब कोई गुलदस्ता ना लाएं। सीएम ने कहा कि मुझे सैंकड़ों हजारों की संख्या में अच्छे अच्छे गुलदस्ते दिए जिनको मैने सहजकर रखा लेकिन मैने सोचा कि इसका काम क्या है। सीएम ने कहा कि मैने 4 तारीख को आपकी सेवा करने की शपथ ली और 12 13 दिन हो गए मुझे अब कोई गुलदस्ता भेंट न करेंष सीएम ने कहा कि किसी को मुझे कुछ भेंट करना है तो पेड़ दें जिसे हम कहीं न कहीं लगाएंगे जिससे प्राकृति संरक्षित हो। सीएम ने इस दौरान कहा कि आज हम सब लोगों को निश्चित रुप से उत्तराखंड संस्कृति और प्राकृति का केंद्र है जो पूरी दुनिया को दिशा देने का काम उत्तराखंड करता है।

प्रदेश में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण हो हरेला पर्व पर हमें यह संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों द्वारा प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए अनेक सराहनीय प्रयास किए गए। हमारी भावी पीढ़ी को हरा भरा उत्तराखंड मिले, इस दिशा में हमें लगातार प्रयास करने होंगे। जल स्रोतों के सूखने पर मुख्यमंत्री (CM) ने चिन्ता जताते हुए कहा कि जल स्रोतों के पुनर्जीवन की दिशा में प्रयास करने होंगे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड संस्कृति और प्रकृति का केंद्र भी है। उत्तराखंड की धरती से पर्यावरण संरक्षण का संदेश विश्वभर में जाए। वृक्षारोपण एवं अनेक सामाजिक कार्यों से हम सबको अपना योगदान देना होगा । उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यहां के धार्मिक परंपराएं, रीति रिवाज का व्यापक प्रसार हुआ है।

वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि सरकार द्वारा विकास के साथ पर्यावरण संतुलन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। उत्तराखंड का संतुलित विकास हो यह हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि कुछ कार्य आत्म संतुष्टि के लिए भी होने चाहिए। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का परिणाम आज सबके सामने है। प्रकृति अनेक रूपों में बदला जरूर लेती है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की धरती लोगों की आस्था का केंद्र है।

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