बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए उत्तराखंड पुलिस द्वारा चलाया जा रहा है “आपरेशन मुक्ति: भिक्षा नहीं शिक्षा दें” अभियान

देहरादून: बाल भिक्षावृत्ति की रोकथाम तथा बाल भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों को भिक्षावृत्ति से हटाकर समाज की मुख्य धारा में जोडने के उद्देश्य से “आपरेशन मुक्ति: भिक्षा नहीं शिक्षा दें” अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान को पुलिस महानिदेशक, उत्तराखण्ड के निर्देशन में सम्पूर्ण राज्य में चलाया जा रहा है।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून महोदय की अध्यक्षता में अभियान में सम्मिलित टीमों के साथ पुलिस कार्यालय में गोष्ठी आयोजित की गयी। गोष्ठी के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय द्वारा आपरेशन मुक्ति के तहत अब तक की गयी कार्यवाही की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उपस्थित लोगों को सम्बोधित करते हुए द्वारा बताया गया कि किसी भी बच्चे के 16 से 18 वर्ष की आयु तक का होने तक उसकी जिम्मेदारी उसके अभिभावकों की रहती है, यदि इस दौरान अभिभावकों व परिजनों द्वारा बच्चे को अच्छी शिक्षा देते हुए उसका नियमित रूप से मार्ग दर्शन किया जाये तो वह आगे चलकर देश के भविष्य निर्माण में सहायक सिद्ध हो सकता है। इसी वजह से यह और भी अधिक आवश्यक हो जाता है कि, उक्त अभियान के तहत हम ऐसे ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक अपनी पहुंच बनायें, जो भिक्षा वृत्ति की दलदल में फॅसे हुए हैं तथा उन्हें इस दलदल से बाहर निकालते हुए शिक्षा की ओर ले जायें।

भिक्षावृत्ति की रोकथाम हेतु चलाये जा रहे उक्त अभियान के अपेक्षाकृत अच्छे परिणाम परिलक्षित होने पर उक्त अभियान को दिनाँक 01-03-2021 से 30-04-2021 तक बढाया गया है। उक्त अभियान के तहत प्रथम चरण में दिनांक 01-03-21 से 15-03-21 तक भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चों व उनके परिवारों का पूर्ण विवरण तैयार कर ऐसे बच्चों को चिन्हित किया गया, जिन्हें विद्यालय/डे-केयर में दाखिल किया जाना है, साथ ही इस सम्बध में सम्बधित विभागों से समन्वय स्थापित किया गया। द्वितीय चरण में दिनांक 16-03-21 से 31-03-21 तक स्कूल कालेजों, सार्वजनिक स्थलों आदि स्थानों पर बच्चों को भिक्षा न देने के संबंध में रैली, बैनर, पम्पलेट्स, नुक्कड नाटक व अन्य माध्यमों से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। तृतीय चरण में दिनांक 1-04-21 से 30-04-21 तक भिक्षा वृति में लिप्त बच्चों को भिक्षावृति से हटाकर उनकी तथा उनके माता-पिता की कांउसलिग कर बच्चों को शिक्षा प्रदान करने, उनके अभिभावकों को रोजगार दिलाने का प्रयास करने तथा बच्चों के पुनः भिक्षावृति में लिप्त पाये जाने पर उनके अभिभावको के विरूद्ध अभियोग पंजीकृत किये जाने की कार्यवाही की जाएगी।