Uttarakhand: प्राकृतिक आपदा में लापता मज़दूरों के परिवारों को, अब सरकार दे रही 29-29 लाख

uttarakhand
 

देहरादून: पिछले चार महीने पहले जब 7 फरवरी को उत्तराखंड (Uttarakhand) के चमोली ज़िले में ग्लेशियर फटने के बाद भारी बाढ़ की आपदा आई थी, तब वहां उत्तर प्रदेश के 29 मज़दूर लापता हो गए थे। ये मज़दूर उप्र के लखीमपुर व उत्तराखंड से सटे आसपास के गावों के थे, जो तपोवन विष्णुगढ़ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। इन 29 मज़दूरों को अब सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है. इस घोषणा से होगा यह कि इनके परिवारों की तलाश की अर्ज़ियां अब बंद कर दी जाएंगी और विभिन्न योजनाओं के तहत मृतकों के परिवारों को जो लाभ दिया जा रहा है, इनके परिवारों को भी मिलेगा।

लखीमपुर खेरी ​ज़िले के कुल 33 और शाहजहांपुर ज़िले का 1 मज़दूर फरवरी में बाढ़ में बह गया था। इनमें से पांच के शव बाद में बरामद कर लिये गए थे लेकिन 29 का पता तबसे ही नहीं चला था। सरकारी प्रक्रिया के दौरान अब इन्हें मृत घोषित करते हुए इनकी तलाश संबंधी फाइलें बंद की गई हैं। जानिए कि कैसे इस नतीजे तक बात पहुंची और अब इनके परिवारों को कितनी रकम मिलेगी ।

मृत घोषित किए जाने के बाद इन मज़दूरों के परिवारों में से प्रत्येक को कुल 29 लाख रुपये मिलेंगे। राष्ट्रीय थर्मल पावर कॉर्पोरेशन यानी एनटीपीसी की ओर से प्रत्येक को 20 लाख का मुआवज़ा दिया जाएगा, जबकि उत्तराखंड( Uttarakhand) आपदा राहत कोष से 4 लाख, उत्तर प्रदेश सरकार व केंद्र की ओर से 2 लाख और उत्तराखंड सरकार की लाभार्थी योजना के तहत 1 लाख रुपये की रकम दी जाएगी।

यह भी पढ़े: http://CM TSR ने टिहरी की जनता को दी बड़ी सौगात, अधिकारियो को दिए निर्देश